
रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान अपने अंतिम चरण में है। इसी दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बस्तर के दौरे पर आ रहे हैं। वह बस्तर पंडुम 2025 के समापन कार्यक्रम में शामिल होंगे, जो क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति का भव्य उत्सव है।
बस्तर दौरे का विशेष महत्व
अमित शाह की इस यात्रा से नक्सल उन्मूलन अभियान को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इससे सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ेगा और सरकार की रणनीति को मजबूती मिलेगी। इससे पहले, दिल्ली में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री से मुलाकात की थी, जहां नक्सल मुद्दे पर अहम चर्चा हुई थी।
बस्तर पंडुम 2025: अंतिम चरण की ओर
यह महोत्सव बस्तर की जनजातीय संस्कृति को समर्पित है, जिसमें पारंपरिक नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, चित्रकला, जनजातीय व्यंजन और पेय से जुड़ी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। कार्यक्रम तीन चरणों में संपन्न हो रहा है—जनपद स्तरीय (12-20 मार्च), जिला स्तरीय (21-23 मार्च) और अब अंतिम संभाग स्तरीय प्रतियोगिता 1 से 3 अप्रैल तक दंतेवाड़ा में होगी, जिसमें अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
बस्तर की लोककला और संस्कृति की भव्य प्रस्तुति
इस महोत्सव में बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रदर्शन हुआ। पारंपरिक नृत्य, गीत-संगीत, वेशभूषा, आभूषण और व्यंजनों ने इस आयोजन को खास बनाया। प्रतिभागियों का मूल्यांकन उनकी मौलिकता, पारंपरिकता और प्रस्तुति के आधार पर किया गया, जिसके लिए एक विशेष समिति गठित की गई, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आदिवासी समाज के वरिष्ठ मुखिया, पुजारी और अनुभवी कलाकार शामिल हैं।
अमित शाह की इस यात्रा से न केवल नक्सल विरोधी अभियान को बल मिलेगा, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।